सामाजिक क्षेत्र

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  उन्होंने १९५० में कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ चेरिटी की स्थापना की। ४५ सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ, और मरते हुए इन्होंने लोगों की मदद की और साथ ही चेरिटी के मिशनरीज के प्रसार का भी मार्ग प्रशस्त किया



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         १९७९ में नोबेल शांति पुरस्कार और १९८० में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। मदर टेरेसा के जीवनकाल मेंमिशनरीज़ ऑफ चेरिटी का कार्य लगातार विस्तृत होता रहा और उनकी मृत्यु के समय तक यह १२३ देशों में ६१० मिशन नियंत्रित कर रही थी। इसमें एचआईवी/एड्सकुष्ठऔर तपेदिक के रोगियों के लिए धर्मशालाएं/ घर शामिल थे, और साथ ही सूप रसोई, बच्चों और परिवार के लिए परामर्श कार्यक्रम, अनाथालय और विद्यालय भी थे। मदर टेरसा की मृत्यु के बाद उन्हें पोप जॉन पॉल द्वितीय ने धन्य घोषित किया और उन्हें कोलकाता की धन्य की उपाधि प्रदान की।




आलोचना
   कईव्यक्तियों,सरकारों,औरसंस्थाओंकेद्वाराउनकीप्रशंसाकीजातीरहीहै,यद्यपिउन्होंनेआलोचनाकाभीसामकया है। इसमें कई व्यक्तियों, जैसे क्रिस्टोफ़र हिचेन्स, माइकल परेंटी,अरूप चटर्जी (विश्व हिन्दूपरिषद) द्वारा की गई आलोचना शामिल हैं, जो उनके काम (धर्मान्तरण) के विशेष तरीके के विरुद्ध थे। इसके अलावा कई चिकित्सा पत्रिकाओं में भी उनकी धर्मशालाओं में दी जाने वाली चिकित्सा सुरक्षा के मानकों की आलोचना की गई और अपारदर्शी प्रकृति के बारे में सवाल उठाए गए, जिसमें दान का धन खर्च किया जाता था।

   मदर टेरेसा के विचार 
   1 जिस व्यक्ति को कोई चाहने वाला न हो, कोई ख्याल रखने वाला न हो, जिसे हर कोई भूल चुका हो,मेरे विचार से वह किसी ऐसे व्यक्ति की तुलना में जिसके पास कुछ खाने को न हो ,कहीं बड़ी भूख, कही बड़ी गरीबी से ग्रस्त है





   2 छोटी चीजों में वफादार रहिये क्योंकि इन्ही में आपकी शक्ति निहित है.



        नमन
   जिन कोढ़ से ग्रस्त बीमार लोगो को समाज देखना भी पसंद नहीं करता ऐसे लोगो की निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाली इस महान आत्मा को हम सत-सत नमन करते हैं.
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                                                                        धन्यवाद